मंगलवार, दिसंबर 08, 2009

बेरुखी यह आपकी होगी गवारा कब तलक ?

बेरुखी यह आपकी होगी गवारा कब तलक ?

हुस्न करता इश्कसे, देखें, किनारा कब तलक



हमनवा बन जाइएगा, झूमने मेहफ़िल लगे

मैं बजाऊँ साजेदिलका एकतारा कब तलक ?



दो हिमाला का पता या फिर पता दो यार का

दरबदर फिरता रहूँगा बेसाहारा कब तलक ?



छुप न पाये चाँद-तारें शाम के होते जवाँ

इस जहाँसे तुम छुपाओगी नजारा कब तलक ?



आ, 'भँवर', उनको सुनाए हालेदिल मिलकर गले

धडकने खुदकी सुनेगा दिल हमारा कब तलक ?

1 टिप्पणी:

योगेश स्वप्न ने कहा…

छुप न पाये चाँद-तारें शाम के होते जवाँ

इस जहाँसे तुम छुपाओगी नजारा कब तलक ?


behatareen. milind , sabhi sher khoobsurat hain badhaai.