गुरुवार, नवंबर 05, 2009

वही शाम होगी, वही रात होगी

वही शाम होगी, वही रात होगी
वही अजनबीसी मुलाकात होगी


अभी स्वप्नभी मैं नहीं देख पाया
अभी जागनेकी पुन: बात होगी


घडी दो घडी का मिलन है जुदाई
मिलें उम्रभर तो अलग बात होगी


समझमें न आए कि पूछू, न पूछू
जनाज़ा उठेगा कि बारात होगी


अमानत समझकर न लौटाइयेगा
'भँवर' दिल दिया है तो सौगात होगी

4 टिप्‍पणियां:

शोभित जैन ने कहा…

अमानत समझकर न लौटाइयेगा
'भँवर' दिल दिया है तो सौगात होगी

bahut khoob ... har sher lajaaba..

योगेश स्वप्न ने कहा…

behatareen, sabhi sher , mubarak.

Harkirat Haqeer ने कहा…

समझमें न आए कि पूछू, न पूछू
जनाज़ा उठेगा कि बारात होगी


वाह....लाजवाब....!!

योगेश ’अर्श’ ने कहा…

घडी दो घडी का मिलन है जुदाई
मिलें उम्रभर तो अलग बात होगी


वाह... क्या बात हैं...